बिहार का अफसर भाई के साथ चला रहा था ठग गैंग, खातों में करोड़ों के ट्रांजेक्शन मिले

प्रधानमंत्री उज्जवला गैस वितरण योजना में एचपीसीएल गैस एजेंसी देने के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर बिहार में बैठा सरकारी अफसर भाई के साथ ठग गिरोह चला रहा था। उसने जोधपुर के बनाड़ क्षेत्रवासी रिटायर्ड सैन्यकर्मी को झांसे में लेकर 8.69 लाख रु. ठग लिए। दो महीने चले इस फ्रॉड में शातिर ने पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के नाम का फर्जी एजेंसी अलॉटमेंट लैटर जारी किया। साथ ही एसबीआई से 35 लाख लोन स्वीकृत होकर खाते में जमा होने का मैसेज भी पीड़ित के मोबाइल पर भेजा था। ठगी का पता चलने पर पीड़ित बनाड़ पुलिस के पास पहुंचे। इस गिरोह तक पहुंचने की जिम्मेदारी मिलने पर साइबर क्राइम यूनिट ने 4 महीने मशक्कत करके गिरोह के बारे में पुख्ता सुराग जुटाए। फिर बनाड़ थानाधिकारी अशोक आंजणा और यूनिट के सब इंस्पेक्टर कमल पुरी की दो टीमाें ने बिहार से गिरोह के दोनों भाई को गिरफ्तार किया। 


19 सितंबर को कराया था केस दर्ज


डीसीपी (ईस्ट) धर्मेंद्रसिंह यादव ने बताया कि नांदड़ी सुभाष नगर निवासी सेना से रिटायर्ड हवलदार मनोहरसिंह जाट ने गत 19 सितंबर को बनाड़ थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें बताया कि उनके पास एक व्यक्ति का कॉल आया। उसने एचपीसीएल द्वारा प्रधानमंत्री उज्जवला गैस वितरण योजना के आवेदन शुरू होने की बात कहते हुए गूगल पर सर्च करके आवेदन करने को कहा था। उसकी बातों में आकर परिवादी ने एक फर्जी वेबसाइट, जो हूबहू असली जैसी दिख रही थी, पर आवेदन कर दिया। इसके बाद खुद को एचपीसीएल अफसर बताने वाले शातिर ने उनसे अलग-अलग बहाने करके विभिन्न खातों में 8,68,880 रु. जमा करवा लिए। पूरी तरह टेक्नोलॉजी का उपयोग कर की गई ठगी की वारदात का खुलासा कर असली बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस आयुक्त प्रफुल्ल कुमार के निर्देश पर टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन की जिम्मेदारी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम यूनिट के उपनिरीक्षक कमलपुरी गोस्वामी, दिनेश व कांस्टेबल राजेश कुमार मीणा को सौंपी गई।


35-40 सिम व वेबसाइट की जानकारी जुटा पहुंचे शातिरों तक
इस टीम ने परिवादी द्वारा उपलब्ध करवाए मोबाइल नंबरों की छानबीन शुरू की तो पता चला कि गिरोह ने एक के बाद एक तकरीबन 35-40 सिम का उपयोग किया था। फर्जी वेबसाइट के डोमेन रजिस्टर करने के लिए भी फर्जी मोबाइल नंबर व ईमेल का उपयोग किया था। पीड़ित द्वारा जिन खातों में राशि जमा करवाई थी, वो भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले थे। इतनी जटिलता के बावजूद टीम 4 माह पड़ताल में जुटी रही और असली आरोपियों के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाई। तब, डीसीपी ईस्ट के निर्देश पर बनाड़ थानाधिकारी आंजणा के साथ एसआई गोस्वामी, हैड कांस्टेबल पप्पाराम, कांस्टेबल सुरेश, साहबराम, राजेश मीणा की दो टीम गठित कर बिहार भेजी। 
 


15 हजार सैलरी फिर भी आलीशान मकान
बिहार पहुंची जोधपुर पुलिस को पता चला कि शातिर ठग नवादा के रजोली इलाके में रहने वाला अमित भारती और उसका भाई अभिषेक भारती हैं। दोनों  अलग-अलग आलीशान मकान में रहते हैं। अमित बिहार की सहकारी समिति बिस्कोमान में कुछ माह पहले ही सहायक गोदाम प्रबंधक के पद पर लगा था और प्रोबेशन पर है। उसका भाई अभिषेक पटना के फुलवारी शरीफ के एक अपार्टमेंट में रहता है। एक के पकड़े जाने पर दूसरे के फरार होने की संभावना देख आंजणा ने दो टीम बनाकर एक साथ दबिश देकर अमित व अभिषेक को गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय न्यायालयों से दाेनाें का अलग-अलग ट्रांजिट रिमांड लिया गया। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त लैपटॉप, कई मोबाइल, बड़ी मात्रा में पेन ड्राइव, बैंकों की पासबुकें, इंटरनेट डोंगल बरामद किए। दोनों के असली व फर्जी नाम से खोले खातों में करोड़ों के ट्रांजेक्शन की जानकारी भी सामने आई। जबकि अमित का वेतन 15 हजार रु. ही था। उधर, बिस्कोमान के अफसरों को अमित की गिरफ्तारी का पता चला, तो वे भी सकते में आ गए। उसे बर्खास्त करने की तैयारी है। शनिवार को पुलिस दोनों को लेकर जोधपुर पहुंची और कोर्ट में पेश कर 10-10 दिन के रिमांड पर लिया है। शातिरों से मंडोर एसीपी के नेतृत्व में पूछताछ हो रही है।


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